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शनिवार, 23 दिसंबर 2023
रूहों का खेल
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सोमवार, 18 दिसंबर 2023
शुक्रवार, 17 नवंबर 2023
मुँह छिपाने से
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रविवार, 12 नवंबर 2023
सोमवार, 23 अक्टूबर 2023
सूरज से गुस्ताख़ी
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सोमवार, 2 अक्टूबर 2023
शुक्रवार, 29 सितंबर 2023
रविवार, 23 अगस्त 2009
जाने कैसे लोग
जलता है जब घर किसीका ,हँसते हैं
समझाते हैं ज़माने की ऊँच नीच हमको
ख़ुद अपनी नियत पर जो नकाब रखतें हैं
खुश हैं अगर आप तो क्यों खुश हैं
रचते हैं कोई साजिश दिल आपका दुखाते हैं
छिपके करते हैं वार,भाग जाते हैं
जुबाँ शेर की जिगर गीद्डों का रखते हैं
जाने कैसे लोग यंहाँ बसते हैं
जलता है जब घर किसीका हँसते हैं
:)
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बुधवार, 19 अगस्त 2009
जिंदगी जब ठहराव होती है
जिंदगी जब ठहराव होती है
हर सुबह शाम की बात होती है
बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
तब खुद से खुद की बात होती है
युहीं खो जाती हो तुम जब पास हो कर भी
मुझे भी एक गुमशुदा की तलाश होती है
जब भी हो जाता हूँ उदास हँसते हँसते
यारों में तेरी बेवफाई की बात होती है
जब भी आता है सावन पे प्यार मुझको
दिल के हर कोने में बगावत की आवाज होती है
जब भी देखता हूँ फूलों को मुस्कुराते हुए
किताब में रखे एक सूखे हुए फूल की याद आती है
माना की इस जहाँ में है कोई नहीं अपना
मगर फिर भी
हर रोज किसी के आने की आस होती है
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शुक्रवार, 14 अगस्त 2009
थके हुए पाँव
बालू रेत पर
थके हुए पाँव का
अक्स भी ऐसा ही उभरता है
थका हुआ ,बोझिल सा
एक समग्र और लक्ष्य भेदी जीवन का
यही तो परिणाम है
एक थकान
वरना बालू की रेत पर
हवा के झोंके से गुजर जाते
और लहरों से अठखेलिया करते
थके हुए पाँव का
अक्स भी ऐसा ही उभरता है
थका हुआ ,बोझिल सा
एक समग्र और लक्ष्य भेदी जीवन का
यही तो परिणाम है
एक थकान
वरना बालू की रेत पर
हवा के झोंके से गुजर जाते
और लहरों से अठखेलिया करते
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मंगलवार, 4 अगस्त 2009
तेज धूप का सफर
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सर्वाधिकार सुरक्षित© लेखक-विपिन बिहारी गोयल
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शनिवार, 1 अगस्त 2009
मन बंजारा
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