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सोमवार, 18 दिसंबर 2023

रविवार, 12 नवंबर 2023

शुक्रवार, 29 सितंबर 2023

रविवार, 23 अगस्त 2009

जाने कैसे लोग



जाने कैसे लोग यहाँ बसते हैं

जलता है जब घर किसीका ,हँसते हैं
समझाते हैं ज़माने की ऊँच नीच हमको
ख़ुद अपनी नियत पर जो नकाब रखतें हैं
खुश हैं अगर आप तो क्यों खुश हैं
रचते हैं कोई साजिश दिल आपका दुखाते हैं
छिपके करते हैं वार,भाग जाते हैं
जुबाँ शेर की जिगर गीद्डों का रखते हैं
जाने कैसे लोग यंहाँ बसते हैं
जलता है जब घर किसीका हँसते हैं



:)

बुधवार, 19 अगस्त 2009

जिंदगी जब ठहराव होती है

जिंदगी जब ठहराव होती है
हर सुबह शाम की बात होती है
बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
तब खुद से खुद की बात होती है
युहीं खो जाती हो तुम जब पास हो कर भी
मुझे भी एक गुमशुदा की तलाश होती है
जब भी हो जाता हूँ उदास हँसते हँसते
यारों में तेरी बेवफाई की बात होती है
जब भी आता है सावन पे प्यार मुझको
दिल के हर कोने में बगावत की आवाज होती है
जब भी देखता हूँ फूलों को मुस्कुराते हुए
किताब में रखे एक सूखे हुए फूल की याद आती है
माना की इस जहाँ में है कोई नहीं अपना
मगर फिर भी
हर रोज किसी के आने की आस होती है

शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

थके हुए पाँव

बालू रेत पर
थके हुए पाँव का
अक्स भी ऐसा ही उभरता है
थका हुआ ,बोझिल सा
एक समग्र और लक्ष्य भेदी जीवन का
यही तो परिणाम है
एक थकान
वरना बालू की रेत पर
हवा के झोंके से गुजर जाते
और लहरों से अठखेलिया करते

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

तेज धूप का सफर

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तेज़ धूप का सफ़र पर्ल संस्थान जोधपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक से साभार

सर्वाधिकार सुरक्षित© लेखक-विपिन बिहारी गोयल


शनिवार, 1 अगस्त 2009

मन बंजारा

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तेज़ धूप का सफ़र पर्ल संस्थान जोधपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक से साभार

सर्वाधिकार सुरक्षित© लेखक-विपिन बिहारी गोयल