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बुधवार, 8 नवंबर 2023
जल्वा-नुमा हो जाओ
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मुआफ करना तुम्हें दोस्त न कह सकूँगा मेरी आस्तीन में कोई जगह खाली नहीं है
कुछ और भी हैं मेरी जिन्दगी की तस्वीरें, मैं वो नहीं जो यारों ने मुझे समझा है~अज्ञात
"Cogito, ergo sum"
"Life is like an Echo. It always comes back to you. So give the world best you can, and the best will come back to you."
Tall man small shadow
Romantic love story based on existentialism
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Vipin Behari Goyal
Jodhpur, Rajasthan, India
Poet,Writer,Thinker,Learner, Manager, financial wizard, troubleshooter,dependable, unpredictable Author of "Tall man small shadow"
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मुश्किलें
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पेड़ “अधिशेष स्मृतियों” काव्य संग्रह २
बेमौसम बरसात
अंजान बन कर
फिर बादल छा गये
तुम्हारी ख़ुशी में ख़ुश
मैंने कभी पीछे मुड कर नहीं देखा
Final Solution
शगूफ़ेबाज़ी
जीने का सलीक़ा
साज़िश
शेर जब थक कर
तुम किस लायक़ हो
इज्जत का जनाजा
ना जाने कितने गुल खिलाती हो
ये कहाँ का इंसाफ़ है
तुम्हारे चाहने से
राख उड़ के
मेरे साथ चलते रहो
मुझसे देखा ना गया
Olivia
तुम्हें यक़ीं आ जाये
रोक सको तो रोक लो
वीराने में
तुम्हारा मुक़द्दर
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Stained Soul
एक बार
जय बाबा री
गुनाह दर गुनाह
मुँह छिपाने से
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सवाल अब भी बाक़ी हैं
ख़त्म कहानी
अब गाँव में कोई नदी नहीं बहती
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ख़्वाब या हक़ीक़त
तारे जितना दूर हूँ मैं
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ना साहिल का पता है
क्या करें
अधूरी प्रेम कहानी
वक्त आ गया
अंजाम अभी बाक़ी है…
मैं हाँ भरने वाली थी
मेरे इंतज़ार में..
ऐसे नहीं आना चाहिए था
सप्तपर्णी का पेड़
जल्वा-नुमा हो जाओ
ज़िंदा लाशें
मुखौटा उतार कर देखो
आरज़ू
ज़िंदगी जब ठहराव होती है
अक्ल पर पर्दा
ज़िंदादिल हूँ
हर बार धोखा…
जो जैसा.. one of my most memorable poems
कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…,
तुम्हारी हार
चाहोगे जिसे
तेरी गली में…..💫
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तुम ना बदलीं….💫
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ठहर जाओ
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