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बुधवार, 9 सितंबर 2009

अब तो रूक के देख लो

अब तो रूक के देख लो फांसला जो तय किया  
किससे तुमने क्या लिया , किसको तुमने क्या दिया 
चले कुछ दूर फिर भी , आज तक जो साथ है 
और साथ चल कर भी आज तक जो दूर हैं 
उस प्यार पर अधिकार था , और वह अहसान था 
फिर भी उसका बदला हमने एक सा ही क्यों दिया  
हैं दुआऐं कुछ साथ तो बददुआ भी कम नहीं  
गिरने और सभंलने का सिलसिला यूँ चलता रहा  
भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं 
और बुरा होने पर थू थू हर जगह उसने किया  
सूख गया हर सब्ज रिश्ता अब उलाहना भी मिलता नहीं  
एक पत्र इजहार का वक्त पर जो तुमने दिया नहीं




:)

14 टिप्‍पणियां:

  1. भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं
    और बुरा होने पर थू थू हर जगह उसने किया

    बहुत खूब जनाब | बहुत पते की बात लिखी है |

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  2. गिरने और सभंलने का सिलसिला यूँ चलता रहा
    भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं

    वाह बहुत ही सुन्दर रचना.................. ये पंक्तियाँ दिल को छू गयी....

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  3. "भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं
    और बुरा होने पर थू थू हर जगह उसने किया "

    यह भी सच ही कहा आपने । यह आम है । आभार ।

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  4. भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं
    और बुरा होने पर थू थू हर जगह उसने किया
    बहुत बढ़िया।
    बधाई!

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  5. भला जिनका किया वो आज जिक्र तक करते नहीं
    और बुरा होने पर थू थू हर जगह उसने किया

    गोयल भाई,
    बहुत ही सही कहा है आपने.बधाई!!

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  6. सूख गया हर सब्ज रिश्ता अब उलाहना भी मिलता नहीं
    एक पत्र इजहार का वक्त पर जो तुमने दिया नहीं

    बहुत ही सही जज्बात को अत्यधिक कुशलता से कविताबद्ध किया है.

    हार्दिक बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  7. अब तो रूक के देख लो फांसला जो तय किया
    किससे तुमने क्या लिया , किसको तुमने क्या दिया .....

    JAJBAAT SE BHAIR, GAHRE EHSAAS LIYE KHOOBSOORAT GAZAL HAI AAPKI .... JEEVAN KE SACH KO SHERON MEIN LIKH DIYA HAI AAPNE ....

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  8. "एक पत्र इजहार का वक्त पर जो तुमने दिया नहीं"
    अशआर बहुत अच्छे हैं।
    बधाई!

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  9. हैं दुआऐं कुछ साथ तो बददुआ भी कम नहीं ....... sahi hai

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  10. sundar rachana hai sir... aapne manav man ko bilkul sahi ukera hai....
    dhanyawad meri rachnaon par vichar prakat karne ke liye...
    kuch nayee bhi dali hain ...jab aap jaise bade rachnakaron ka aashirwad milta hai to mujh jaise naye rachnakaron ko bada hi protsahan milta hai... dhanyawad...!

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  11. विपिन जी , आपके ब्लॉग पर आ कर बहुत अच्छा लगा !
    खुबसूरत रचनाये पढ़ने को मिलीं ..., ये रचना भीतर झाँकने
    को मजबूर करती है !साथ ही चेतावनी भी ..अब तो रुक के देख लो !

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  12. लगा जैसे मेरे मुँह से अल्फाज़ छीने गए हों !

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