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मंगलवार, 11 अगस्त 2009

प्रणय का मूक निवेदन

मुझे तुम्हारे घर के सामने लगे

बैगनी रंग के फूलों वाले पेड से

प्यार हो गया है

एक दिन मैं उधर से

गुजर रहा था

अचानक हवा का

तेज झोंका आया

और ढेर सारे बैंगनी फूल

मेरे कदमों मैं बिछ गये

कह कर तो सभी करते हैं

पर प्रणय का ऐसा मूक निवेदन

कहीं देखा है तुमने ।

-विपिन बिहारी गोयल

13 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है-बहुत बढ़िया

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  2. विपिन जी लाजवाब रचना...मेरी बधाई स्वीकार कीजिये...वाह.
    नीरज

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  3. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  4. aapka swagat hai... isi tarah llikhte rahiye

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  5. बहुत ही सुक्ष्म अनुभुतियों को आपने सुंदर तरीके से इस रचना में पिरो दिया है. बहुत शुभकामनाएं.

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  6. मुझे तुम्हारे घर के सामने लगे
    बैगनी रंग के फूलों वाले पेड से
    प्यार हो गया है

    अन्दाज़ बहुत ही बढ़िया है सर ।

    tanhafalak.blogspot.com

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  7. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  8. पुरानी टिप्‍पणियो के फाण्‍ट सुधारें भई .. 10 अगस्‍त के बाद की कविताएं ही पढी जा पा रही हैं।

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  9. saral,sahaj aur sunder si aapki rachi hui bangni pholon ne man ko chu liya.

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