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बुधवार, 19 अगस्त 2009

जिंदगी जब ठहराव होती है

जिंदगी जब ठहराव होती है
हर सुबह शाम की बात होती है
बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
तब खुद से खुद की बात होती है
युहीं खो जाती हो तुम जब पास हो कर भी
मुझे भी एक गुमशुदा की तलाश होती है
जब भी हो जाता हूँ उदास हँसते हँसते
यारों में तेरी बेवफाई की बात होती है
जब भी आता है सावन पे प्यार मुझको
दिल के हर कोने में बगावत की आवाज होती है
जब भी देखता हूँ फूलों को मुस्कुराते हुए
किताब में रखे एक सूखे हुए फूल की याद आती है
माना की इस जहाँ में है कोई नहीं अपना
मगर फिर भी
हर रोज किसी के आने की आस होती है

8 टिप्‍पणियां:

  1. किताब में रखे एक सूखे हुए फूल की याद आती है
    माना की इस जहाँ में है कोई नहीं अपना
    मगर फिर भी
    हर रोज किसी के आने की आस होती है

    bahut hi khubsoorat hai aapaki rachana ......mujhe yahi aas jinda rakhe huye hai ......khubsoorat

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  2. जिंदगी जब ठहराव होती है
    हर सुबह शाम की बात होती है
    बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
    तब खुद से खुद की बात होती है

    वाह जी वाह....विपिन जी लाजवाब कर दिया आपने तो ........!!

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  3. बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
    तब खुद से खुद की बात होती है

    kitna sahi kaha hai baaton baaton main aapne...

    ...pasand aaiya !!
    kyunki aapna jaisa laga !!

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  4. mere blog par aane ke liye shukriya...

    ye kavita bahut hi sundar bhaw ko veyakt kar rahi hai.
    padkar bahut hi achcha laga.

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  5. aap mere blog par aaye bahut bahut dhanyawaad..
    बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम
    तब खुद से खुद की बात होती है
    bahut khoobsurat..

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  6. पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ कि आप मेरे ब्लॉग पर आए और टिपण्णी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!
    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहत ख़ूबसूरत, लाजवाब और शानदार रचना लिखने के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

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  7. वाह वाह वाह वाह.....वाह विपिन जी...मज़ा आ गया...क्या बात हैं..
    बधाइयाँ...

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  8. माना की इस जहाँ में है कोई नहीं अपना
    मगर फिर भी
    हर रोज किसी के आने की आस होती है
    ati sundar .byan hui har baat laazwwab hai.

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