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सोमवार, 17 अगस्त 2009

उफ़, ये क्या हो गया

उफ़ ये क्या हो गया
बातों बातों में इजहार हो गया
अब कैसे मिलाऊंगा मैं निगाहें
तेरा साया तक शर्मसार हो गया
आँख खुली तो तुम्हें आगोश में पाया
मेरा जीवन फूलों की कतार हो गया
तेरी चाहत बस युहीं बरकरार रहे
मुझे खुदा पे एतबार हो गया

7 टिप्‍पणियां:

  1. 'मेरा जीवन फूलों की कतार हो गया
    तेरी चाहत बस युहीं बरकरार रहे
    मुझे खुदा पे एतबार हो गया'

    - सुन्दर.

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  2. लजबाव रचना......सुन्दर दृष्टिकोण.

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  3. bhut sundar...

    apke bhawo me ehsas ki kmi nahi hai...

    mastano-ka-mehkma.blogspot.com

    is blog par aap ye kavita pde (Mera Pyaar)

    us kvita me is bhaw ka kuch or hi rup milta hai...

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  4. Khuda per aapka aitbaar yuhi bana rahe .....aap isi tarah se apne mann ke udgar kagaj per ootarte rahe.....Keep it up....

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  5. वाह बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना बहुत अच्छा लगा!

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