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रविवार, 23 अगस्त 2009

जाने कैसे लोग



जाने कैसे लोग यहाँ बसते हैं

जलता है जब घर किसीका ,हँसते हैं
समझाते हैं ज़माने की ऊँच नीच हमको
ख़ुद अपनी नियत पर जो नकाब रखतें हैं
खुश हैं अगर आप तो क्यों खुश हैं
रचते हैं कोई साजिश दिल आपका दुखाते हैं
छिपके करते हैं वार,भाग जाते हैं
जुबाँ शेर की जिगर गीद्डों का रखते हैं
जाने कैसे लोग यंहाँ बसते हैं
जलता है जब घर किसीका हँसते हैं



:)

3 टिप्‍पणियां:

  1. जाने कैसे लोग यंहाँ बसते हैं
    जलता है जब घर किसीका हँसते हैं

    --आज की बस्तियों में ऐसे ही लोग बसते हैं मेजोरिटी में.

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  2. दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने!सही में बस्तियों में इसी तरह के लोग बसते हैं!

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