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सोमवार, 10 अगस्त 2009

जो जैसा चल रहा था चलने देते


जो जैसा चल रहा था चलने देते


गलतफहमियों का दाय्ररा बढ्ने देते


तो ही अच्छा था ।


दिल को बहलाने का बहाना तो था


सतरंगे सपनों का खजाना तो था ।


कुछ कह कर हमने कुछ खो दिया


कितनी सादगी से तुमने दिल तोड दिया


उम्र भर भटकने को तन्हां छॉड दिया ।


-विपिन बिहारी गोयल

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